महान कार्टूनिस्ट चाचा चौधरी की मौत
हम तूमको ना भूल पाएंगे प्राण
जगजीत सिंह की बचपन पर आधारित गजल वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी को शायद हीं किसी ने न सुना हो... और चाचा चौधरी कॉमिक्स शायद ही कोई भूल पाए... हम सभी को चाचा चौधरी जैसा कैरेक्टर देने वाले प्राण का निधन हो गया है। आप को हमारी और से श्रद्धाजंलि है प्राण...
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी
ये दौलत भी ले लो, ये शौहरत भी ले लो, भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी...
मोहल्ले की सबसे पुरानी निशानी, वो बुढिया जिसे बच्चे कहते थे नानी, वो नानी की बातों में परियों का डेरा, वो चेहरे की झुरियों में सदियों का फेरा, भुलाए नहीं भूल सकता है कोई, वो छोटी सी रातें वो लंबी कहानी...
कड़ी धूप में अपने घर से निकलना, वो चिड़िया वो बुलबुल वो तितली पकड़ना, वो गुड़िया की शादी पे लड़ना झगड़ना, वो झूलों से गिरना वो गिर के संभलना, वो पीतल के छल्लों के प्यारे से तोहफे, वो टूटी हुई चूडियों की निशानी...
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी...
इसी तरह कोई ऐसा नहीं होगा जिसने चाचा चौधरी की कहानी न पड़ी हो... वो चाचा चौधरी चो 65 साल का कमजोर दिखने वाला गंजा बुड्डा है पर उसका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है। हाथ में डंडा लिए हुए है वह कई खुलासे करता है और घटनाओं के बढ़ने पर जिसकी मदद करने ज्यूपिटर से साबू धरती पर आता है। यह शायद ही कभी भूला जा सकता है... और यह सब संभव एक ऐसे शख्स ने किया जिसका नाम प्राण कुमार शर्मा था। वो प्राण जिसने सभी को चाचा चौधरी जैसा कैरेक्टर दिया आज हमारे बीच नहीं है उसका 6 अगस्त 2014 को कैंसर की चपेट में आने से मौत हो गई।
देश और दुनिया के महान कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा का 6 अगस्त को निधन हो गया। वे कैंसर से पीड़ित थे। भारत के वॉल्ट डिज्मी कहे जाने वाले प्राण 60 के दशक में कार्टून बनाना शुरु किया और लोगों के दिल पर चाचा चौधरी बनकर राज किया। प्राण ने चाचा चौधरी, साबू, पिंकी, बिल्लू, श्रीमतीजी और बीन्नी जैसे किरदारों को हमें दिया। चाचा का जन्म गुलाम भारत के लाहौर में 15 अगस्त 1938 को हुआ और वे अपना 77 वां जन्म दिन मना पाते इससे सात दिन पहले 6 अगस्त 2014 को कैंसर के मुंह में समा गए। प्राण की 10 भाषाओं में 25 हजार से ज्यादा फीचर्स प्रकाशित हुए। 5 सौ से ज्यादा टाइटल्स छपे। यहां तक कि 2009 में चाचा चौधरी फिल्म तक बनाई गई जिसमें रघुवीर यादव ने चाचा चौधरी का किरदार निभाया था।
प्राण की शिक्षा मध्यप्रदेश में हुई थी। उन्होंने मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की थी। उन्होंने दिल्ली के अखबार मिलाप में तब कार्टून बनाना से शुरु किया जब विदेशी कार्टून करेक्टर मेंड्रेक और ब्लॉडी का दौर था। उन्होंने 10 भाषाओं में 5 सौ से ज्यादा कॉमिक्स लिखे। इसके लिए 2 लाख से ज्यादा कार्टून बनाए गये। प्राण एक समय माइकल जक्सन से भी ज्यादा मशहूर थे।
जगजीत सिंह की बचपन पर आधारित गजल वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी को शायद हीं किसी ने न सुना हो... और चाचा चौधरी कॉमिक्स शायद ही कोई भूल पाए... हम सभी को चाचा चौधरी जैसा कैरेक्टर देने वाले प्राण का निधन हो गया है। आप को हमारी और से श्रद्धाजंलि है प्राण...
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी
ये दौलत भी ले लो, ये शौहरत भी ले लो, भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी...
मोहल्ले की सबसे पुरानी निशानी, वो बुढिया जिसे बच्चे कहते थे नानी, वो नानी की बातों में परियों का डेरा, वो चेहरे की झुरियों में सदियों का फेरा, भुलाए नहीं भूल सकता है कोई, वो छोटी सी रातें वो लंबी कहानी...
कड़ी धूप में अपने घर से निकलना, वो चिड़िया वो बुलबुल वो तितली पकड़ना, वो गुड़िया की शादी पे लड़ना झगड़ना, वो झूलों से गिरना वो गिर के संभलना, वो पीतल के छल्लों के प्यारे से तोहफे, वो टूटी हुई चूडियों की निशानी...
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी...
इसी तरह कोई ऐसा नहीं होगा जिसने चाचा चौधरी की कहानी न पड़ी हो... वो चाचा चौधरी चो 65 साल का कमजोर दिखने वाला गंजा बुड्डा है पर उसका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलता है। हाथ में डंडा लिए हुए है वह कई खुलासे करता है और घटनाओं के बढ़ने पर जिसकी मदद करने ज्यूपिटर से साबू धरती पर आता है। यह शायद ही कभी भूला जा सकता है... और यह सब संभव एक ऐसे शख्स ने किया जिसका नाम प्राण कुमार शर्मा था। वो प्राण जिसने सभी को चाचा चौधरी जैसा कैरेक्टर दिया आज हमारे बीच नहीं है उसका 6 अगस्त 2014 को कैंसर की चपेट में आने से मौत हो गई।
देश और दुनिया के महान कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा का 6 अगस्त को निधन हो गया। वे कैंसर से पीड़ित थे। भारत के वॉल्ट डिज्मी कहे जाने वाले प्राण 60 के दशक में कार्टून बनाना शुरु किया और लोगों के दिल पर चाचा चौधरी बनकर राज किया। प्राण ने चाचा चौधरी, साबू, पिंकी, बिल्लू, श्रीमतीजी और बीन्नी जैसे किरदारों को हमें दिया। चाचा का जन्म गुलाम भारत के लाहौर में 15 अगस्त 1938 को हुआ और वे अपना 77 वां जन्म दिन मना पाते इससे सात दिन पहले 6 अगस्त 2014 को कैंसर के मुंह में समा गए। प्राण की 10 भाषाओं में 25 हजार से ज्यादा फीचर्स प्रकाशित हुए। 5 सौ से ज्यादा टाइटल्स छपे। यहां तक कि 2009 में चाचा चौधरी फिल्म तक बनाई गई जिसमें रघुवीर यादव ने चाचा चौधरी का किरदार निभाया था।
प्राण की शिक्षा मध्यप्रदेश में हुई थी। उन्होंने मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की थी। उन्होंने दिल्ली के अखबार मिलाप में तब कार्टून बनाना से शुरु किया जब विदेशी कार्टून करेक्टर मेंड्रेक और ब्लॉडी का दौर था। उन्होंने 10 भाषाओं में 5 सौ से ज्यादा कॉमिक्स लिखे। इसके लिए 2 लाख से ज्यादा कार्टून बनाए गये। प्राण एक समय माइकल जक्सन से भी ज्यादा मशहूर थे।

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